सफ़र हालाँकि तेरे साथ अच्छा चल रहा है बराबर से मगर एक और रास्ता चल रहा है
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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उस धोके ने तोड़ दिया है इतना मुझ को अब कुछ भी समझा लेती है दुनिया मुझ को
Shariq Kaifi
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कौन कह सकता है उस को देख कर ये वही है जो हमारा था कभी
Shariq Kaifi
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तुम वो लड़की मुझे लगती तो नहीं आम गोपी से जो राधा हो जाए
Shariq Kaifi
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ये काम दोनों तरफ़ हुआ है उसे भी आदत पड़ी है मेरी
Shariq Kaifi
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वहाँ ईद क्या वहाँ दीद क्या जहाँ चाँद रात न आई हो
Shariq Kaifi
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