उस धोके ने तोड़ दिया है इतना मुझ को अब कुछ भी समझा लेती है दुनिया मुझ को
Writer
Shariq Kaifi
@shariq-kaifi
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7
Sher
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Ghazal
1
Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
फिर तुम्हारे बराबर खड़ा शख़्स कुछ इस तरह से हँसा जैसे तुम ने बताया हो उस को है ये भी दीवाना मेरा
sherKuch Alfaaz
कौन था वो जिस ने ये हाल किया है मेरा किस को इतनी आसानी से हासिल था मैं
sherKuch Alfaaz
पिछली बेंच का बच्चा है दिल इस को हाथ उठाने देना
sherKuch Alfaaz
सब आसान हुआ जाता है मुश्किल वक़्त तो अब आया है
sherKuch Alfaaz
कौन कह सकता है उस को देख कर ये वही है जो हमारा था कभी
sherKuch Alfaaz
कहाँ रोते उसे शादी के घर में सो इक सूनी सड़क पर आ गए हम
sherKuch Alfaaz
बहुत जनाज़े थे रास्ते में क़दम भी हम गिन न पाए अपने
sherKuch Alfaaz
तेरी बातों में यूँँ भी आ गया मैं भटकने का बहुत दिल कर रहा था
sherKuch Alfaaz
ज़माने पहले जिसे डूबना था डूब गया न जाने अब यहाँ किस को बचाने आता हूँ
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