समझाते समझाते बस हम ने ये समझा ख़ुद को ही केवल समझाया जा सकता है
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारा दिल मेरे दिल के बराबर हो नहीं सकता वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता
Dagh Dehlvi
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सुनते हैं के मिल जाती है हर चीज़ दुआ से इक रोज़ तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से
Rana Akbarabadi
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मन की मन में ही भुनाने में लगे हो हाथ में जो है निकलता जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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लोग यहाँ पर आएँगे तो रंग लगाने मुझ को फिर भी शायद रंगों में लिपटा इक हाथ तुम्हार हो सकता था दो बच्चों ने मल मल कर जब रंग लगाया इक दूजे को दोस्त यही लगता है ऐसा साथ हमारा हो सकता था
Divya 'Kumar Sahab'
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यही वो लोग जब माँगो मदद मुँह फेर लेते हैं यही वो हैं जो कहते हैं मदद कोई नहीं करता
Divya 'Kumar Sahab'
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तुम तो कहते थे कि मैं रोता नहीं हूँ कब से इतना मुस्कुराया जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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चुन लिया किश्तों में मरना तब बहुत सोचा नहीं फ़ैसला करना था मुझ को ख़ुद-कुशी या शा'इरी
Divya 'Kumar Sahab'
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