sherKuch Alfaaz

सारी दुनिया से किनारा भी नहीं कर सकते तेरी यादों पे गुज़ारा भी नहीं कर सकते रू-ब-रू आज हुए भी तो हुए ऐसी जगह हम कोई साफ़ इशारा भी नहीं कर सकते

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मिटते मिटते मिटती है हो अगर कसक कोई ज़ख़्म चाहे जैसा हो, भरते भरते भरता है

Daagh Aligarhi

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ले हम भी सर उठाते हैं मुहब्बत दिखा जो दाँव आते हैं मुहब्बत अलिफ़ से मीम तक लाए थे जिन को वो हम को ही सिखाते हैं मुहब्बत

Daagh Aligarhi

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जिस की इक तस्वीर ले आई लहू इन आँखों में वो मुक़ाबिल आएगा तो आँखें ही ले जाएगा

Daagh Aligarhi

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आप हैं दोस्त तो फिर आपसे दुश्मन बेहतर राम को याद तो कर लेता था रावण अक्सर आप मज़बूर थे बिकने को बिके मंदे में हमनें बाजार की शर्तों को लगा दी ठोकर

Daagh Aligarhi

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बस्ती बस्ती ख़ाक उड़ाये, बस वहशत का मारा हो उस सेे इश्क़ की आस न करना जिस का मन बंजारा हो ख़ुद को शाइ'र कहते रहना दिल को लाख सुकूँ दे दे लेकिन दुनिया की नज़रों में तुम अब भी आवारा हो

Daagh Aligarhi

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