शायद दुआ में तेरी अब वैसा असर नहीं रहा हूँ साहिब-ए-फ़िराश मैं लेकिन मैं मर नहीं रहा
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कितना दिलकश था वो ज़माना भी ईद थी छत पे तेरा आना भी
Marghoob Inaam Majidi
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तीसरा शख़्स मेरा मसला था तीसरा शख़्स मैं ही निकला था
Marghoob Inaam Majidi
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देख कर ग़ौर से गुज़र जाना कैसे सीखा है ये हुनर जाना
Marghoob Inaam Majidi
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अब तो हर बात से डर लगता है अपने हालात से डर लगता है रौशनी भाती नहीं आँखों को चाँदनी रात से डर लगता है
Marghoob Inaam Majidi
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हाजमा हो तो तेरे जैसा हो क़स में वादे पचा के बैठी है
Marghoob Inaam Majidi
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