अब तो हर बात से डर लगता है अपने हालात से डर लगता है रौशनी भाती नहीं आँखों को चाँदनी रात से डर लगता है
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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ख़्बाब आँखों में बंद कर लेते बात गर दिल की चंद कर लेते आप भी हो ही जाते दीवाने गर किसी को पसंद कर लेते
Sandeep Thakur
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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तीसरा शख़्स मेरा मसला था तीसरा शख़्स मैं ही निकला था
Marghoob Inaam Majidi
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कितना दिलकश था वो ज़माना भी ईद थी छत पे तेरा आना भी
Marghoob Inaam Majidi
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हाजमा हो तो तेरे जैसा हो क़स में वादे पचा के बैठी है
Marghoob Inaam Majidi
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कोई मुझे याद ही नहीं करता मैं किसी को याद ही नहीं हूँ अब
Marghoob Inaam Majidi
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अपनी नज़रों में नागवार हुए बे-तहाशा-ओ-बे-शुमार हुए ख़ुद को सय्याद हम समझते थे एक तितली के हम शिकार हुए
Marghoob Inaam Majidi
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