कोई मुझे याद ही नहीं करता मैं किसी को याद ही नहीं हूँ अब
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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तीसरा शख़्स मेरा मसला था तीसरा शख़्स मैं ही निकला था
Marghoob Inaam Majidi
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ईद के बा'द का दिन है साहब ईद के दिन भी कहाॅं ख़ुश था मैं
Marghoob Inaam Majidi
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हाजमा हो तो तेरे जैसा हो क़स में वादे पचा के बैठी है
Marghoob Inaam Majidi
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कितना दिलकश था वो ज़माना भी ईद थी छत पे तेरा आना भी
Marghoob Inaam Majidi
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तेरे ख़ातिर हुआ हूँ ऐसे रुसवा अजब औबाश बन कर रह गया हूँ कि मेरी रूह तो तुम मार डाले मैं ज़िंदा लाश बन कर रह गया हूँ
Marghoob Inaam Majidi
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