ईद के बा'द का दिन है साहब ईद के दिन भी कहाॅं ख़ुश था मैं
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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चाँद इतरा रहा है घंटों से एक तस्वीर अपनी भेजो तो
Marghoob Inaam Majidi
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हाजमा हो तो तेरे जैसा हो क़स में वादे पचा के बैठी है
Marghoob Inaam Majidi
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देख कर ग़ौर से गुज़र जाना कैसे सीखा है ये हुनर जाना
Marghoob Inaam Majidi
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शायद दुआ में तेरी अब वैसा असर नहीं रहा हूँ साहिब-ए-फ़िराश मैं लेकिन मैं मर नहीं रहा
Marghoob Inaam Majidi
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अब तो हर बात से डर लगता है अपने हालात से डर लगता है रौशनी भाती नहीं आँखों को चाँदनी रात से डर लगता है
Marghoob Inaam Majidi
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