सोचता हूँ कि क्या चीज़ ये ज़िंदगी है बढ़ रही है या फिर उम्र कम हो रही है जज़्ब, बहरें, मआ'नी, अदब, तज़रबे आदि इन सभी को मिला जो बने, शा'इरी है
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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ये समझ में आ गया बेरोज़गारी के दिनों में पैसा है अपनी जगह और दोस्ती अपनी जगह पर
Saahir
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कोई है ही नहीं मेरे जैसा बात गर बे-वफ़ाई पे आए
Saahir
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हमीं ने दिल को पत्थर बोला है साहिर हमीं ने पत्थरों पर दिल बनाया है
Saahir
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पहले ही इश्क़ ने ये बताया मुझे छोड़ कर जाएगी आशिक़ी दर्द में मौत को कहते हैं सब बुरा दर्द क्यूँ कितना आराम है आख़िरी दर्द में
Saahir
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रोते-रोते सोए थे नहीं पता फिर किस का सर था किस के कंधे पर
Saahir
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