sherKuch Alfaaz
सूरज लिहाफ़ ओढ़ के सोया तमाम रात सर्दी से इक परिंदा दरीचे में मर गया
Athar nasik31 Likes
सूरज लिहाफ़ ओढ़ के सोया तमाम रात सर्दी से इक परिंदा दरीचे में मर गया
हाल मीठे फलों का मत पूछो रात दिन चाकूओं में रहते हैं
Fahmi Badayuni
102 likes
मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
100 likes
मिलना हमारा कम हुआ फिर बात कम हुई क़िस्तों में मुझ ग़रीब की ख़ैरात कम हुई
Bhawana Srivastava
75 likes
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
Waseem Barelvi
78 likes
इश्क़ से अपने कुछ चुने लम्हें अनकहे और अनसुने लम्हें आओ मिल कर जियें दुबारा से सर्द रातों के गुनगुने लम्हें
Sandeep Thakur
76 likes
Our suggestions based on Athar nasik.
More moods that pair well with Athar nasik's sher.