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सुना है इश्क़ में बीमार मर के छूटते हैं तो आओ हम भी ये भुगतान कर के छूटते हैं

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उस के बिन तुम रह सकते हो समझो मत ख़ुद को शाइ'र कह सकते हो समझो मत सब को अपना समझा तब ये समझा है सब को अपना कह सकते हो समझो मत

Praveen Sharma SHAJAR

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तेरी यादों का मौसम ख़ूब-सूरत है मगर फिर भी इसे जाना पड़ेगा अब ये अगली रुत में अड़चन है

Praveen Sharma SHAJAR

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ये वो धूप है जिस से दिल को सिर्फ़ भिगोया जा सकता है ये वो नशेमन जिस में केवल ग़म को संजोया जा सकता है जॉन की ग़ज़लें पढ़ने लगे हो तो फिर इतना ध्यान में रखना जॉन की ग़ज़लें पढ़ लेने पर केवल रोया जा सकता है

Praveen Sharma SHAJAR

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वफ़ा थी इश्क़ था मासूमियत थी तुम्हारे बा'द सब कुछ मर गया है

Praveen Sharma SHAJAR

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न कर बर्बाद लेकिन दुख तो दे थोड़ा बहुत मुझ को मैं कैसे इस ख़ुशी में शा'इरी कर पाऊँगा जानाॅं

Praveen Sharma SHAJAR

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