सुना है इश्क़ में बीमार मर के छूटते हैं तो आओ हम भी ये भुगतान कर के छूटते हैं
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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उस के बिन तुम रह सकते हो समझो मत ख़ुद को शाइ'र कह सकते हो समझो मत सब को अपना समझा तब ये समझा है सब को अपना कह सकते हो समझो मत
Praveen Sharma SHAJAR
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तेरी यादों का मौसम ख़ूब-सूरत है मगर फिर भी इसे जाना पड़ेगा अब ये अगली रुत में अड़चन है
Praveen Sharma SHAJAR
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ये वो धूप है जिस से दिल को सिर्फ़ भिगोया जा सकता है ये वो नशेमन जिस में केवल ग़म को संजोया जा सकता है जॉन की ग़ज़लें पढ़ने लगे हो तो फिर इतना ध्यान में रखना जॉन की ग़ज़लें पढ़ लेने पर केवल रोया जा सकता है
Praveen Sharma SHAJAR
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वफ़ा थी इश्क़ था मासूमियत थी तुम्हारे बा'द सब कुछ मर गया है
Praveen Sharma SHAJAR
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न कर बर्बाद लेकिन दुख तो दे थोड़ा बहुत मुझ को मैं कैसे इस ख़ुशी में शा'इरी कर पाऊँगा जानाॅं
Praveen Sharma SHAJAR
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