tarikiyon ne khud ko milaya hai dhup mein saya jo sham ka nazar aaya hai dhup mein
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तमाम दिन के दुखों का हिसाब करना है मैं चाहता हूँ कोई मेरे आस-पास न हो
Tahir Faraz
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ज़िंदगी तेरे तअक़्क़ुब में हम इतना चलते हैं कि मर जाते हैं
Tahir Faraz
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जम्अ'' करता जो मैं आए हुए संग सर छुपाने के लिए घर होता
Tahir Faraz
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वो सर भी काट देता तो होता न कुछ मलाल अफ़्सोस ये है उस ने मेरी बात काट दी
Tahir Faraz
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इस बुलंदी पे बहुत तन्हा हूँ काश मैं सब के बराबर होता
Tahir Faraz
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