तमाम फ़र्क़ मोहब्बत में एक बात के हैं वो अपनी ज़ात का नईं है हम उस की ज़ात के हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तमाम होश ज़ब्त इल्म मस्लहत के बा'द भी फिर इक ख़ता मैं कर गया था माज़रत के बा'द भी
Pallav Mishra
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हमारा काम तो मौसम का ध्यान करना है और उस के बा'द के सब काम शश-जहात के हैं
Pallav Mishra
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शहर-ए-जाँ में वबाओं का इक दौर था मैं अदा-ए-तनफ़्फ़ुस में कमज़ोर था
Pallav Mishra
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ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है
Pallav Mishra
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मैं चाहूँ तो उस सेे लिपट कर रो लूँ पर जग जाएगा वो तो और रुलाएगा
Pallav Mishra
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