ये जिस्म तंग है सीने में भी लहू कम है दिल अब वो फूल है जिस में कि रंग-ओ-बू कम है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हमारा काम तो मौसम का ध्यान करना है और उस के बा'द के सब काम शश-जहात के हैं
Pallav Mishra
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तमाम होश ज़ब्त इल्म मस्लहत के बा'द भी फिर इक ख़ता मैं कर गया था माज़रत के बा'द भी
Pallav Mishra
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मैं चाहूँ तो उस सेे लिपट कर रो लूँ पर जग जाएगा वो तो और रुलाएगा
Pallav Mishra
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तिरे लबों में मिरे यार ज़ाइक़ा नहीं है हज़ार बोसे हैं उन पर प इक दुआ नहीं है
Pallav Mishra
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मकीन-ए-दिल को ख़ानुमा-ख़राबियों से इश्क़ था क़याम ढूँढ़ता रहा तुम्हारी छत के बा'द भी
Pallav Mishra
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