तेरी मुस्कान मेरे ज़ख़्मों पर रोज़ मरहम का काम करती है
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुम्हें पाकर ही आया नूर रुख़ पे वगरना ख़ुश नहीं हूँ मैं अज़ल से
shampa andaliib
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सिर्फ़ फूलों को चूमने वाले जब बहार आई तब नज़र आए
shampa andaliib
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तुम्हारा साथ जुगनू की तरह अब हमारी ज़िंदगी रौशन करेगा
shampa andaliib
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निगाह-ए-यार के जलवे न पूछो बदन पर चाँद तारे जड़ गए हैं
shampa andaliib
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तिरी आँखों के अंदर देखती हैं मिरी आँखें समुंदर देखती हैं यही आँखें जहाँ वालों को देखें यही आँखें कलंदर देखती हैं
shampa andaliib
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