तिरी आँखों के अंदर देखती हैं मिरी आँखें समुंदर देखती हैं यही आँखें जहाँ वालों को देखें यही आँखें कलंदर देखती हैं
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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वो ख़ुदा है या है ख़ुदा जैसा जिस के दम पर खड़े हुए हैं हम
shampa andaliib
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उस ने आगाज़-ए-पज़ीराई किया है ऐसे और ठहरने को नहीं करता है दिल अब मेरा
shampa andaliib
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उस को लफ़्ज़ों में बयाँ करना है मुश्किल आज दिल को जिस ख़ुशी ने छू लिया है
shampa andaliib
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लोग उस पर भी हक़ जताते हैं जिस की क़ीमत चुकाई है मैं ने
shampa andaliib
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तुम्हें पाकर ही आया नूर रुख़ पे वगरना ख़ुश नहीं हूँ मैं अज़ल से
shampa andaliib
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