`तू मेरे पास आ कर बैठ मुझ सेे बात कर ऐ दोस्त ये मुमकिन है कोई दरिया ख़राबों से निकल आए
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
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ये जानते हैं ठीक नहीं माँग रहे हैं हम एक खंडहर को मकीं माँग रहे हैं सब माँग रहे हैं ख़ुदा से तेरा जिस्म और हम हैं, कि फ़क़त तेरी जबीं माँग रहे हैं
Siddharth Saaz
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तुम सेे बिछड़ के हम को यही लग रहा है अब जैसे मिटा दिया है ख़ुदा ने लिखा हुआ
Siddharth Saaz
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ये आसमाँ में कोई बुत बैठा भी है कि नईं या हम ज़मीं के लोग यूँँ ही चीखते हैं बस
Siddharth Saaz
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