तुझे शीशा बनाया है ख़ुदा ने ध्यान रक्खा कर गले पत्थर के जो लगने लगेगा टूट जाएगा
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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शिकायत के सिवा देखो उसे कुछ भी नहीं आता अगर हम एक-दो कर दें उसी पर रूठ जाता है
Shubham Seth
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दिन गुजारूंँ आप के बिन ये तो था मुश्किल बहुत ख़ुद ख़ुशी से मर गया मैं, ख़ुद-कुशी आसान थी
Shubham Seth
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उन को दाना पानी मिलता, उन के भी बच्चे सो जाते कितना अच्छा होता जो सब अपने-अपने घर को जाते
Shubham Seth
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अकेलापन हमें खा जाएगा मालूम तो था तुझे देखे बिना फिर भी मरेंगे कम अकेले
Shubham Seth
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सभी को लग रहा था ख़ुद-कुशी से मर गया था मैं मगर सच्चाई ये थी, ख़ुद ख़ुशी से मर गया था मैं
Shubham Seth
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