तुझ को बतलाता मगर शर्म बहुत आती है तेरी तस्वीर से जो काम लिया जाता है
Related Sher
ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
122 likes
रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
100 likes
मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
100 likes
सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
126 likes
वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है ये अगर रस्मों रिवाजों से बग़ावत है तो है
Deepti Mishra
102 likes
More from Tehzeeb Hafi
तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ समुंदरों से अकेले में बात करनी है
Tehzeeb Hafi
51 likes
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
Tehzeeb Hafi
54 likes
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे मैं जंगल में पानी लाया करता था
Tehzeeb Hafi
56 likes
यही एक दिन बचा था देखने को उसे बस में बैठा कर आ रहे हैं
Tehzeeb Hafi
58 likes
आज मिलना था बिछड़ जाने की निय्यत से हमें आज भी वो देर से पहुँचा है कितना तेज़ है
Tehzeeb Hafi
82 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Tehzeeb Hafi.
Similar Moods
More moods that pair well with Tehzeeb Hafi's sher.







