तुम समुंदर की बात करते हो यहाँ आँखों से दरिया बहता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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तुझे पाकर ज़माने की वफ़ा अच्छी नहीं लगती सिवा तेरे किसी की भी अदा अच्छी नहीं लगती
Gulshan
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छोड़ रहे हो अच्छा है तुम तो ये भी कर सकते हो मैं तो जिस से मिल जाता हूँ साथ निभाने लगता हूँ
Gulshan
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मेरे दस्त-ए-तमन्ना पर तुम्हारे हाथ का होना बड़े हासिद बनाएगा बहुत से दिल जलाएगा
Gulshan
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जब भी मिलते हैं तहे दिल से दुआ देते हैं ऐसे होते हैं मोहब्बत को निभाने वाले
Gulshan
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सफ़र को बीच में हम छोड़कर वापस चले आते इशारा लौट आने का किसी ने तो किया होता
Gulshan
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