तुम्हारे ख़्वाब में हम खो गए कुछ देर के ख़ातिर हमारे साथ में तुम हो गए कुछ देर की ख़ातिर
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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उस की याद न आएगी तो क्या हो जाएगा मेरा मन कोना-कोना सूना हो जाएगा
Umesh Maurya
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उसी के ख़्वाब भी अल्फ़ाज़ भी जज़्बात भी उस के उसी को भूल जाऊँ मैं, नहीं खुदगर्ज़ भी इतना
Umesh Maurya
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तुम्हारे आज से ही तो तुम्हारा कल भी निकलेगा सवालों के ही अंदर से तुम्हारा हल भी निकलेगा
Umesh Maurya
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ज़मीं का जल कभी बादल रहा है तमाशा ज़िन्दगी का चल रहा है
Umesh Maurya
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वक़्त आशंकित हुआ ये देख कर ख़त्म हो जाए न स्वर विद्रोह का
Umesh Maurya
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