तुम्हारे रास्तों को छोड़ कर अगर हम ने किसी गली में कभी ख़ाक उड़ाई तो कहना हमारे इश्क़ को दो दिन का खेल कहते हो तमाम उम्र न तन्हा बिताई तो कहना
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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ये उदास शाम और तेरी याद फ़ुर्क़तों के जाम और तेरी याद जान ही कहीं मेरी ले न जाए 'जौन' का कलाम और तेरी याद
Viru Panwar Viyogi
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ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है जैसे सर से बला उतारी है
Viru Panwar Viyogi
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ये तन्हाई उसी की बद-दुआओं का असर है दुखाया था किसी लड़की का दिल बचपन में मैं ने
Viru Panwar Viyogi
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वक़्त से पहले ही न सड़ जाए सब्र के फल में रस ज़ियादा है आज के दौर के दिवानों में इश्क़ कम है हवस ज़ियादा है
Viru Panwar Viyogi
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नहीं देती हो अब भी ध्यान तुम हम पे कमी है कुछ हमारी सादगी में क्या
Viru Panwar Viyogi
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