ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है जैसे सर से बला उतारी है
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है
Jaun Elia
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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ये उदास शाम और तेरी याद फ़ुर्क़तों के जाम और तेरी याद जान ही कहीं मेरी ले न जाए 'जौन' का कलाम और तेरी याद
Viru Panwar Viyogi
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ज़िंदगी को समझते थे तोहफ़ा ज़िंदगी तो मगर सज़ा निकली मैं ने जब चाहा तब नहीं आई मौत भी यार बे-वफ़ा निकली
Viru Panwar Viyogi
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ये तन्हाई उसी की बद-दुआओं का असर है दुखाया था किसी लड़की का दिल बचपन में मैं ने
Viru Panwar Viyogi
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ये अलग बात है हरे नहीं हैं ज़ख़्म लेकिन अभी भरे नहीं हैं
Viru Panwar Viyogi
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वक़्त से पहले ही न सड़ जाए सब्र के फल में रस ज़ियादा है आज के दौर के दिवानों में इश्क़ कम है हवस ज़ियादा है
Viru Panwar Viyogi
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