ये उदास शाम और तेरी याद फ़ुर्क़तों के जाम और तेरी याद जान ही कहीं मेरी ले न जाए 'जौन' का कलाम और तेरी याद
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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ज़िंदगी को समझते थे तोहफ़ा ज़िंदगी तो मगर सज़ा निकली मैं ने जब चाहा तब नहीं आई मौत भी यार बे-वफ़ा निकली
Viru Panwar Viyogi
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ये दिल-ओ-ज़ेहन भी चमक उठते रौशनी इस तरह बनानी थी उस की नज़रों में भी न आ पाए जिस के दिल में जगह बनानी थी
Viru Panwar Viyogi
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ये अलग बात है हरे नहीं हैं ज़ख़्म लेकिन अभी भरे नहीं हैं
Viru Panwar Viyogi
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ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है जैसे सर से बला उतारी है
Viru Panwar Viyogi
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सारे रिश्ते फ़ुज़ूल जाते हैं भूलने वाले भूल जाते हैं ये ख़बर आई है कि उस गली में तोहफ़े में अब भी फूल जाते हैैं
Viru Panwar Viyogi
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