ये उदास शाम और तेरी याद फ़ुर्क़तों के जाम और तेरी याद जान ही कहीं मेरी ले न जाए 'जौन' का कलाम और तेरी याद
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
Jaun Elia
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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दोस्ती लफ़्ज़ ही में दो है दो सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी को समझते थे तोहफ़ा ज़िंदगी तो मगर सज़ा निकली मैं ने जब चाहा तब नहीं आई मौत भी यार बे-वफ़ा निकली
Viru Panwar Viyogi
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था वजूद-ए-उदासी ख़तरे में फिर ज़मीं पर मुझे उतारा गया
Viru Panwar Viyogi
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उस के अहबाब बढ़ते जाते हैं मेरी तन्हाई बढ़ती जाती है
Viru Panwar Viyogi
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ये दिल-ओ-ज़ेहन भी चमक उठते रौशनी इस तरह बनानी थी उस की नज़रों में भी न आ पाए जिस के दिल में जगह बनानी थी
Viru Panwar Viyogi
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ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है जैसे सर से बला उतारी है
Viru Panwar Viyogi
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