ये दिल-ओ-ज़ेहन भी चमक उठते रौशनी इस तरह बनानी थी उस की नज़रों में भी न आ पाए जिस के दिल में जगह बनानी थी
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे
Tehzeeb Hafi
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वो हक़ीक़त को किस तरह समझे वहम ने जिस की परवरिश की हो
Kaif Uddin Khan
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ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है जैसे सर से बला उतारी है
Viru Panwar Viyogi
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वक़्त से पहले ही न सड़ जाए सब्र के फल में रस ज़ियादा है आज के दौर के दिवानों में इश्क़ कम है हवस ज़ियादा है
Viru Panwar Viyogi
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तुम्हारे रास्तों को छोड़ कर अगर हम ने किसी गली में कभी ख़ाक उड़ाई तो कहना हमारे इश्क़ को दो दिन का खेल कहते हो तमाम उम्र न तन्हा बिताई तो कहना
Viru Panwar Viyogi
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ज़िंदगी को समझते थे तोहफ़ा ज़िंदगी तो मगर सज़ा निकली मैं ने जब चाहा तब नहीं आई मौत भी यार बे-वफ़ा निकली
Viru Panwar Viyogi
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ये उदास शाम और तेरी याद फ़ुर्क़तों के जाम और तेरी याद जान ही कहीं मेरी ले न जाए 'जौन' का कलाम और तेरी याद
Viru Panwar Viyogi
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