वो हक़ीक़त को किस तरह समझे वहम ने जिस की परवरिश की हो
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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किस ने दस्तक दी ये दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं बाहर कौन है
Rahat Indori
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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है किस को दस्तियाब भला ग़म-शनास शख़्स मुरझाए फूल पर कभी भँवरा न आएगा
Kaif Uddin Khan
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चलो माना ख़ुदा होना बहुत दुश्वार है लेकिन अगरचे सख़्त मुश्किल है महज़ इंसान होना भी
Kaif Uddin Khan
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अगर मुलातफ़त का नाम दीन है बशर ख़ुदा से ना डरे ख़ुदा करे
Kaif Uddin Khan
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जहाँ पे बर्क़ चमकती है उस जगह अक्सर कई निशान हमें तीरगी के मिलते हैं
Kaif Uddin Khan
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कितनी सच्ची सज़ा मिली झूठी क़स में खाने पर
Kaif Uddin Khan
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