चलो माना ख़ुदा होना बहुत दुश्वार है लेकिन अगरचे सख़्त मुश्किल है महज़ इंसान होना भी
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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है किस को दस्तियाब भला ग़म-शनास शख़्स मुरझाए फूल पर कभी भँवरा न आएगा
Kaif Uddin Khan
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कितनी सच्ची सज़ा मिली झूठी क़स में खाने पर
Kaif Uddin Khan
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जहाँ पे बर्क़ चमकती है उस जगह अक्सर कई निशान हमें तीरगी के मिलते हैं
Kaif Uddin Khan
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आशना किरदार उस का ज़ेहन पे यूँँ नक़्श था रंग काग़ज़ पर गिरे तो ख़ुद अयाँ होते गए
Kaif Uddin Khan
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हमारा कूज़ा-गर काहिल बहुत है हमारे कूज़ागर से क्या बनेगा
Kaif Uddin Khan
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