है किस को दस्तियाब भला ग़म-शनास शख़्स मुरझाए फूल पर कभी भँवरा न आएगा
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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अगर मुलातफ़त का नाम दीन है बशर ख़ुदा से ना डरे ख़ुदा करे
Kaif Uddin Khan
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परिंदा ग़र न उड़ सके नहीं सही क़फ़स को तोड़ के मरे ख़ुदा करे
Kaif Uddin Khan
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चलो माना ख़ुदा होना बहुत दुश्वार है लेकिन अगरचे सख़्त मुश्किल है महज़ इंसान होना भी
Kaif Uddin Khan
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कितनी सच्ची सज़ा मिली झूठी क़स में खाने पर
Kaif Uddin Khan
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हमारा कूज़ा-गर काहिल बहुत है हमारे कूज़ागर से क्या बनेगा
Kaif Uddin Khan
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