परिंदा ग़र न उड़ सके नहीं सही क़फ़स को तोड़ के मरे ख़ुदा करे
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
More from Kaif Uddin Khan
कितनी सच्ची सज़ा मिली झूठी क़स में खाने पर
Kaif Uddin Khan
2 likes
है किस को दस्तियाब भला ग़म-शनास शख़्स मुरझाए फूल पर कभी भँवरा न आएगा
Kaif Uddin Khan
1 likes
चलो माना ख़ुदा होना बहुत दुश्वार है लेकिन अगरचे सख़्त मुश्किल है महज़ इंसान होना भी
Kaif Uddin Khan
2 likes
आशना किरदार उस का ज़ेहन पे यूँँ नक़्श था रंग काग़ज़ पर गिरे तो ख़ुद अयाँ होते गए
Kaif Uddin Khan
3 likes
अधूरा छोड़ते हैं इस लिए भी ये क़िस्सा असीर-ए-इश्क़ सभी इन्तहा से डरते हैं
Kaif Uddin Khan
4 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Kaif Uddin Khan.
Similar Moods
More moods that pair well with Kaif Uddin Khan's sher.







