तुम्हारे दर्द से जागे तो उन की क़द्र खुली वगरना पहले भी अपने थे जिस्म-ओ-जान वही
sherKuch Alfaaz
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किस का था
Dagh Dehlvi
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मैं न सोया रात सारी तुम कहो बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो
Prakhar Kanha
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मयख़ाने की क़द्र है मेरी नज़रों में इसने जाने कितनी मौतें टाली हैं
Harsh saxena
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