तुम्हें ज़रूरत क्या कोई त्योहारों की रंग लगाकर गले लगाने आ जाओ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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इस रण में जय और पराजय मेरी है तू गाण्डीव उठा, कर हमला आगे बढ़
Divy Kamaldhwaj
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मेरे भीतर नहीं लिखने की तड़पन है तड़पन, इस लिए मैं लिख रहा हूँ
Divy Kamaldhwaj
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मेरे भीतर नहीं लिखने की तड़पन है तड़पन, इस लिए मैं लिख रहा हूँ
Divy Kamaldhwaj
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सँभलने के लिए कर ली मुहब्बत मगर इस में फिसलना चाहिए था
Divy Kamaldhwaj
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बहुत कुछ बोलना है पर अभी ख़ामोश रहने दो ख़मोशी बोलती है तो, बड़ी आवाज़ करती है
Divy Kamaldhwaj
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