उलझ के रहता होगा बस हिसाबों में वो जो है ना ख़ुदा सोता नहीं होगा
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी बे-ख़बर रही मुझ से ऐसे की ज़िंदगी बसर मैं ने अपने अंदर तुझे बसाया और ढूँढ़ा फिर ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने
Chandan Sharma
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वतन का दुलारा गया आसमाँ को कि कितनों का प्यारा गया आसमाँ को ज़मीं ने सितारे लुटाए फ़लक पे ज़मीं से सँवारा गया आसमाँ को
Chandan Sharma
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तेरे बा'द भी आईं और गईं कितनी ही हसीनाएँ जान मैं ने लेकिन हिज्र के ग़म का वो भौकाल बनाए रक्खा तेरे लौट आने का इस दिल को अरसों तक वहम रहा दोस्त सो बरसों मैं ने भी अपनी दाढ़ी बाल बनाए रक्खा
Chandan Sharma
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मोहब्बत ऐसी पहली वालिदा है जिसे भाता है अपने बेटों का दुख
Chandan Sharma
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मेरे ही साथ रहना था तुम को मुझ से ही दूर जा रही हो तुम रात, दरिया, ये चाँद, तन्हाई जाँ बहुत याद आ रही हो तुम
Chandan Sharma
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