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उलझ के रहता होगा बस हिसाबों में वो जो है ना ख़ुदा सोता नहीं होगा

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ज़िंदगी बे-ख़बर रही मुझ से ऐसे की ज़िंदगी बसर मैं ने अपने अंदर तुझे बसाया और ढूँढ़ा फिर ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने

Chandan Sharma

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वतन का दुलारा गया आसमाँ को कि कितनों का प्यारा गया आसमाँ को ज़मीं ने सितारे लुटाए फ़लक पे ज़मीं से सँवारा गया आसमाँ को

Chandan Sharma

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तेरे बा'द भी आईं और गईं कितनी ही हसीनाएँ जान मैं ने लेकिन हिज्र के ग़म का वो भौकाल बनाए रक्खा तेरे लौट आने का इस दिल को अरसों तक वहम रहा दोस्त सो बरसों मैं ने भी अपनी दाढ़ी बाल बनाए रक्खा

Chandan Sharma

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मोहब्बत ऐसी पहली वालिदा है जिसे भाता है अपने बेटों का दुख

Chandan Sharma

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मेरे ही साथ रहना था तुम को मुझ से ही दूर जा रही हो तुम रात, दरिया, ये चाँद, तन्हाई जाँ बहुत याद आ रही हो तुम

Chandan Sharma

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