उन्हें सदियों न भूलेगा ज़माना यहाँ जो हादसे कल हो गए हैं
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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अकेलेपन से कहाँ तालमेल होता है खिलाड़ी इश्क़ में दो हों तो खेल होता है न लेना इश्क़ के पर्चे में सौ से कम नंबर यहाँ निनानवे वाला भी फेल होता है
Rehman Faris
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उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे
Kumar Vishwas
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आए
Nasir Kazmi
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जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िन्दगी ने भर दिए तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
Nasir Kazmi
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ज़रा सी बात सही तेरा याद आ जाना ज़रा सी बात बहुत देर तक रुलाती थी
Nasir Kazmi
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बस यूँँ ही दिल को तवक़्क़ो' सी है तुझ से वर्ना जानता हूँ कि मुक़द्दर है मेरा तन्हाई
Nasir Kazmi
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देख मोहब्बत का दस्तूर तू मुझ से मैं तुझ से दूर कोशिश लाज़िम है प्यारे आगे जो उस को मंज़ूर
Nasir Kazmi
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