uruj-e-mah ko insan samajh gaya lekin hanuz azmat-e-insan se aagahi kam hai
sherKuch Alfaaz
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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तुझे न आएँगी मुफ़्लिस की मुश्किलात समझ मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ
Umair Najmi
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गाली को प्रणाम समझना पड़ता है मधुशाला को धाम समझना पड़ता है आधुनिक कहलाने की अंधी जिद में रावण को भी राम समझना पड़ता है
Azhar Iqbal
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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