उस से बिछड़ के ख़ुद को सँभाला नहीं गया लगता है गिर पड़ी हूँ किसी चलती रेल से
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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नहीं है घर में तेरी याद के अलावा कुछ तो किस के सामने चाय बना के रखती हूँ
Rehana Qamar
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मुझ को डोली में बिठा डर के हवाले कर दे मेरी माँ मुझ को मुक़द्दर के हवाले कर दे
Rehana Qamar
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जो मुझ से इश्क़ के क़िस्से सुनाता फिरता था कहीं वो मिलता तो मैं उस को आइना देती
Rehana Qamar
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जो कहना चाहती हूँ वो तो कह नहीं पाती ज़बाँ पे तज़्किरे आब-ओ-हवा के रखती हूँ
Rehana Qamar
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