उस पे पत्थर खा के क्या बीती 'ज़फ़र' देखेगा कौन फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्म-ए-शजर देखेगा कौन
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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किसी मासूम बच्चे के तबस्सुम में उतर जाओ तो शायद ये समझ पाओ ख़ुदा ऐसा भी होता है
Zafar Gorakhpuri
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देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए
Zafar Gorakhpuri
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एक मुट्ठी प्यार उस के पास काँसे बे-शुमार वो अगर बाँटे भी तो हिस्से में क्या आ जाएगा
Zafar Gorakhpuri
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देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे
Zafar Gorakhpuri
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फ़ुर्सत मिले तो पूछ कभी उन का हाल भी जो लोग जी रहे हैं तेरे प्यार के बग़ैर
Zafar Gorakhpuri
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