एक मुट्ठी प्यार उस के पास काँसे बे-शुमार वो अगर बाँटे भी तो हिस्से में क्या आ जाएगा
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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किसी मासूम बच्चे के तबस्सुम में उतर जाओ तो शायद ये समझ पाओ ख़ुदा ऐसा भी होता है
Zafar Gorakhpuri
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उस पे पत्थर खा के क्या बीती 'ज़फ़र' देखेगा कौन फल तो सब ले जाएँगे ज़ख़्म-ए-शजर देखेगा कौन
Zafar Gorakhpuri
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पत्थर कहा गया कभी शीशा कहा गया दिल जैसी एक चीज़ को क्या क्या कहा गया
Zafar Gorakhpuri
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देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना तजरबे आए थे संजीदा बनाने के लिए
Zafar Gorakhpuri
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अपने अतवार में कितना बड़ा शातिर होगा ज़िंदगी तुझ से कभी जिस ने शिकायत नहीं की
Zafar Gorakhpuri
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