वहशत है मुझ को लम्स के रिज़्क-ए-हराम से मुझ को मेरे नसीब की रोज़ी नहीं मिली
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तेरे बिन जितने भी ये दिन कटे हैं समझ ले आग पर पैदल चले हैं
Harun Umar
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तुझ सेे कहने में क्या शरम के हम अब किसी दूसरे पे मरते हैं
Harun Umar
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मेरी ख़्वाहिश है मेरे मरने पर आप आएँ भगा दिए जाएँ
Harun Umar
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मर गए थे न हम तुम्हारे लिए और मुर्दे सुना नहीं करते
Harun Umar
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तू तो चेहरे से भी मासूम नज़र आता है तुझ सेे ये किस ने कहा तू भी मोहब्बत कर ले
Harun Umar
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