sherKuch Alfaaz

jis aurat ke darwaaze shahar ke har us shaksh ke liye khule hain jo apni jebon mein chaandi ke chand sikke rakhta ho. khwaah woh mochi ho ya bhangi, langda ho ya loola, khubsoorat ho ya karihatul manzar, uski zindagi ka andaaza ba-khoobi lagaya ja sakta hai.

Related Sher

वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा

Sahir Ludhianvi

206 likes

तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी

Tehzeeb Hafi

331 likes

अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

Tehzeeb Hafi

295 likes

ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके

Tehzeeb Hafi

206 likes

ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे

Tehzeeb Hafi

206 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Saadat Hasan Manto.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Saadat Hasan Manto's sher.