wo aag bujhi to hamein mausam ne jhinjhoda warna yahi lagta tha ki sardi nahin aai
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो
Bashir Badr
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
Meer Taqi Meer
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इक नज़ाकत से मुझे उस ने पागल बोला जब मैं ने चूम लिया प्यार से उस के लब को
Parwez Akhtar
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नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे तुम्हारी मेज़बानी के बहाने कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
Khurram Afaq
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बुरा बनता हूँ कि शायद ऐसे वो मिरे सामने अच्छा बन जाए
Khurram Afaq
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जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए ये कहानी तो हक़ीक़त पे भी तारी हो जाए तेरे हामी है सो उठ कर भी नहीं जा सकते जाने किस वक़्त यहाँ राय-शुमारी हो जाए
Khurram Afaq
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ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
Khurram Afaq
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पहले ये रब्त मेरी ज़रूरत बनाओगे और फिर कहोगे राब्ता मुमकिन नहीं रहा
Khurram Afaq
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