नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे
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Khurram Afaq
@khurram-afaq
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा
sherKuch Alfaaz
बुरा बनता हूँ कि शायद ऐसे वो मिरे सामने अच्छा बन जाए
sherKuch Alfaaz
अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है
sherKuch Alfaaz
जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए ये कहानी तो हक़ीक़त पे भी तारी हो जाए
sherKuch Alfaaz
यूँँ न कर वस्ल के लम्हों को हवस से ता'बीर चंद पत्ते ही तो तोड़े हैं शजर से मैं ने
sherKuch Alfaaz
ज़ख़्म की इज़्ज़त करते हैं देर से पट्टी खोलेंगे
sherKuch Alfaaz
बड़ी मुश्किल से नीचे बैठते हैं जो तेरे साथ उठते-बैठते हैं
sherKuch Alfaaz
दवा से हल न हुआ तो दुआ पे छोड़ दिया तिरा मोआ'मला हम ने ख़ुदा पे छोड़ दिया
sherKuch Alfaaz
बड़ी मुश्किल से नीचे बैठते हैं जो तेरे साथ उठते बैठते हैं
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