वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हमेशा हाथों में होते हैं फूल उन के लिए किसी को भेज के मँगवाने थोड़ी होते हैं
Anwar Shaoor
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इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़ ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
Anwar Shaoor
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सिर्फ़ उस के होंट काग़ज़ पर बना देता हूँ मैं ख़ुद बना लेती है होंटों पर हँसी अपनी जगह
Anwar Shaoor
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मेरे घर के तमाम दरवाज़े तुम से करते हैं प्यार आ जाओ
Anwar Shaoor
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चमन में आप की तरह गुलाब एक भी नहीं हुज़ूर एक भी नहीं जनाब एक भी नहीं
Anwar Shaoor
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