वो वक़्त और थे कि बुज़ुर्गों की क़द्र थी अब एक बूढ़ा बाप भरे घर पे बार है
sherKuch Alfaaz
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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इस वक़्त मुझे जितनी ज़रूरत है तुम्हारी लड़ते भी रहोगे तो मोहब्बत है तुम्हारी
Zia Mazkoor
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घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे
Unknown
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कौन सी बात कहाँ कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है
Waseem Barelvi
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