यार जबसे छोड़कर मुझ को गया है सारी दुनिया को जलाना चाहता हूँ
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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ज़िंदगी मेरी दे दो किसी और को अब न ताक़त है और हौसला भी नहीं
Amaan Pathan
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जो भी मिला वो रख लिया हम ने सहेज कर अब और क्या ही माँगते इस आशिक़ी से हम
Amaan Pathan
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बाम-ए-गर्दूं पे जो सितारे हैं तेरी आँखों के इस्तिआरे हैं
Amaan Pathan
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उस के बिन क्या है जनवरी यारो सर्द रातों में बस सिहरना है
Amaan Pathan
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अभी तुम शमअ जलने दो ज़रा देर अभी बेताब परवाने बहुत हैं
Amaan Pathan
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