वो शाइ'र मर गया इक दिन 'अली' जिस का सहारा था
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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हाल मीठे फलों का मत पूछो रात दिन चाकूओं में रहते हैं
Fahmi Badayuni
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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यहाँ अब कौन दिल का कायल है ,बता हाँ कुछ लिबास होते तो कुछ बात थी
"Nadeem khan' Kaavish"
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तेरे दिल की इक ये बस्ती, पहले उस इक राजा की थी जिस ने तेरे नाम पर, जंगें भी बे-अंदाज़ा की थी
"Nadeem khan' Kaavish"
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तेरे ख़ातिर जहाँ डूबा वो दरिया भी किनारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरी मय्यत पे सबने ही तौबा किया क्यूँँकि आँखों में तेरी ही तस्वीर थी
"Nadeem khan' Kaavish"
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