ये कैसे मलबे के नीचे दबा दिया गया हूँ मुझे बदन से निकालो मैं तंग आ गया हूँ
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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किसी आहट में आहट के सिवा कुछ भी नहीं अब किसी सूरत में सूरत के सिवा क्या रह गया है
Irfan Sattar
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नहीं नहीं मैं बहुत ख़ुश रहा हूँ तेरे बग़ैर यक़ीन कर कि ये हालत अभी अभी हुई है
Irfan Sattar
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ख़ुशबू था मैं बिखरना मेरा इख़्तिसास था इन ज़िम्मेदारियों ने इकट्ठा किया मुझे
Irfan Sattar
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उस की ख़्वाहिश पे तुम को भरोसा भी है उस के होने न होने का झगड़ा भी है लुत्फ़ आया तुम्हें गुमरही ने कहा गुमरही के लिए एक ताज़ा ग़ज़ल
Irfan Sattar
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इक चुभन है कि जो बेचैन किए रहती है ऐसा लगता है कि कुछ टूट गया है मुझ में
Irfan Sattar
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