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ये मिरी ज़िंदगी ये कुछ भी नहीं बोझ है मुझ को ढो रहा हूँ मैं

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ज़िंदगी बे-ख़बर रही मुझ से ऐसे की ज़िंदगी बसर मैं ने अपने अंदर तुझे बसाया और ढूँढ़ा फिर ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने

Chandan Sharma

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तेरे बा'द भी आईं और गईं कितनी ही हसीनाएँ जान मैं ने लेकिन हिज्र के ग़म का वो भौकाल बनाए रक्खा तेरे लौट आने का इस दिल को अरसों तक वहम रहा दोस्त सो बरसों मैं ने भी अपनी दाढ़ी बाल बनाए रक्खा

Chandan Sharma

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हिज्र से डरते हो गर इश्क़ न करना देखो वस्ल पल भर के लिए है कि जुदाई है बहुत

Chandan Sharma

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हज़रत ए नासेह कहते हैं मुहब्बत मार देगी इश्क़ कहता है मुहब्बत को तिज़ारत मार देगी और गुलचीं तो करेगा बारहा यूँँ ग़ारत ए गुल इन गुलों को यार गुलचीं की रफ़ाक़त मार देगी

Chandan Sharma

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कभी देखा नहीं जिस ने बदन के आगे कुछ भी भला वो क्यूँ मुहब्बत जावेदाना ढूँढ़ता है

Chandan Sharma

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