ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे
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अपने दिल में बसाओगे हम को और गले से लगाओगे हम को हम नहीं इतने प्यार के क़ाबिल तुम तो पागल बनाओगे हम को
Abrar Kashif
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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मुमकिन हो आप से तो भुला दीजिए मुझे पत्थर पे हूँ लकीर मिटा दीजिए मुझे
Shahzad Ahmad
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वाक़िआ' कुछ भी हो सच कहने में रुस्वाई है क्यूँँ न ख़ामोश रहूँ अहल-ए-नज़र कहलाऊँ
Shahzad Ahmad
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ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े बस दूर ही से देख लिया और चल पड़े दिल में फिर इक कसक सी उठी मुद्दतों के बा'द इक उम्र के रुके हुए आँसू निकल पड़े
Shahzad Ahmad
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तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा चाय की प्याली में तूफ़ान उठाता क्या है
Shahzad Ahmad
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ज़रा सा ग़म हुआ और रो दिए हम बड़ी नाज़ुक तबीअत हो गई है
Shahzad Ahmad
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