यूँँ लग रहा है क़तरा-ए-मय लब पर आप के जैसे किसी गुलाब की पत्ती पर ओस हो
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीक़े से मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
Waseem Barelvi
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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ज़ीस्त जब मौत की आग़ोश में सो जाएगी हर हक़ीक़त मिरी इक वाक़िआ' हो जाएगी
Shajar Abbas
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ज़ेहन के लब पे तिरा नाम है बस शाम-ओ-सहर नक़्श हैं चश्म पे अब तक तिरी तस्वीर के पाँव
Shajar Abbas
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ज़र्द होने लगी है दस्त-ए-हिना लौट आओ शजर ख़ुदा के लिए
Shajar Abbas
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ये अब से पहले हमेशा तमाशबीन लगी हयात मौत की आग़ोश में हसीन लगी
Shajar Abbas
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ये आज अपने आप से मिल कर ख़बर हुई हम वाक़ई में हाल से बे हाल हैं 'शजर'
Shajar Abbas
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