यूँँ तो ज़माने में अच्छी भी-तर्बियत रखते हैं कुछ रौशन हो के जो अंधेरे की अहमियत रखते हैं कुछ वो जानते क़द्र इंसा की-दिल से होती यहाँ पर बस इस लिए अब भी दिल में-इंसानियत रखते हैं कुछ
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ज़िन्दगी को यूँँ फिर आज़माने के बा'द कुछ भी तो अब नहीं है ज़माने के बा'द कैसे ख़ुद को भी दे अब तसल्ली यहाँ पे कैसे ग़म में है वो गुनगुनाने के बा'द
Naviii dar b dar
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ये फूलों की ख़ुशबू चुरा कर तो देखो इशारों में बातें बता कर तो देखो यूँँ आएँगे वो भी सुकूँ दिल को देने उन्हें ख़्वाब में तुम बुला कर तो देखो
Naviii dar b dar
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ये अदावत भी तो इंसानों की दुश्मन है क्यूँँ न हम थोड़ा मुहब्बत से ही पेश आऍं
Naviii dar b dar
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मुझे अब यूँँ ही दुख दे क़िस्मत मेरी तू कि सच में क़ज़ा से मुहब्बत हो जाए
Naviii dar b dar
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यूँँ ज़िन्दगी के वास्ते भी कुछ नहीं किया ये सोचता है दिल तो उम्र के पड़ाव पर
Naviii dar b dar
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